AchievementsStop

  • प्रदेश में विभिन्न श्रम अधिनियमों के अन्तर्गत 11859 निरीक्षण किये गये ।
  • पाये गये उल्लंघनों में 2584 उपशमन एवं अभियोजन दायर किये गये ।
  • प्रदेश में निस्तारित दावों/औद्योगिक विवादों (सी.पी. /सी.बी. ) एवं प्रतिपालित एवार्ड की संख्या 279 है ।
  • प्रदेश में वेतन सदांय अधिनियम 1936,  न्यूनतम वेतन अधिनियम व ग्रेच्युटी अधिनियम के अन्तर्गत लाभान्वित किये गये श्रमिकों/मृतक श्रमिकों के आश्रितों की संख्या 863 है जिन्हें रू0 1,56,51,130की धनराशि भुगतान करायी गई।
  • प्रदेश में बोनस भुगतान अधिनियम के अन्तर्गत 73,410 श्रमिकों को लाभान्वित किया गया तथा उन्हें रू0 43,66,14,950 की धनराशि बोनस के रूप में भुगतान कराई गई ।
  • प्रदेश में श्रमिकों एवं नियोजकों के मध्य उत्पन्न 05 औद्योगिक विवादों के समझौते कराये गये ।
  • प्रदेश में टेªड यूनियन अधिनियम के अन्तर्गत 12 यूनियनों का पंजीकरण तथा 165 वार्षिक कार्यकारिणी के चुनाव दर्ज कराये गये ।
  • प्रदेश में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत 27,817 श्रमिको का पंजीकरण किया जा चुका है 
  • कर्मकार कल्याण बोर्ड की बैठकें नियमित रूप से की जा रही हैं।
  • प्रदेश में सभी जनपदो एवं  परगनों के बंधुवा श्रमिक सतर्कता समितियों का पुर्नगठन किया गया है
  • प्रदेश में कुल 3387 कारखाने पंजीकृत हैं, जिनमें लगभग 4.1 लाख श्रमिक नियोजित है।
  • प्रदेश में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्यान उपकर अधिनियम 1996 के अन्तर्गत  (सेस) के रूप में कुल रू0 79.26 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुयी है।
  • प्रदेश में विभिन्न श्रम अधिनियमों के अन्तर्गत पंजीयन/नवीनीकरण एवं उपशमन आदि स्रोतों से  रू0 4,01,42,174 की धनराशि राजस्व के रूप में प्राप्त हुई है।

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Common Man’s Interface For  Welfare Schemes(External Website that opens in a new window)

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श्रम आयुक्त संगठन, उत्तराखण्ड की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी।

संवैधानिक, वैधानिक एवं अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अभिसमयों (Convention) के अन्तर्गत प्रतिबद्धताओं के संदर्भ में विभाग के प्रमुख कार्यो एवं दायित्वों का विवरण निम्नांकित हैः-

  • केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा अधिनियमित विभिन्न श्रम कानूनों का प्रवर्तन सुनिश्चित करना। विशेष रूप से न्यूनतम वेतन एवं वेतन भुगतान, कर्मकार प्रतिकर भुगतान, समान कार्य केलिये महिला एवं पुरूष श्रमिकों को समान मजदूरी भुगतान, मातृका हितलाभ सुनिश्चित कराने के साथ-साथ कार्यस्थलों पर उनके यौन उत्पीड़न की शिकायतों के सम्बन्ध में औद्योगिक नियोजन (स्थाई आदेश) अधिनियम के अन्तर्गत आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करना,
  • श्रमिकों को ग्रेच्युटी भुगतान, बोनस भुगतान, अन्तर्राज्यिक एवं संविदा श्रमिकों के हितलाभ आदि तथा सामाजिक सुरक्षा के लाभ सुनिश्चित कराना।
  • बाल/बंधुवाश्रम प्रथा के उन्मूलन हेतु संबंधित कानूनों एवं माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना।